कार्यक्रम अच्छा था। कई लोग मिले। कुछ पुराने। कुछ नये परिचय बने। जो शब्द मंच से बोले ये उनकी वाहवाही हुई। ऐसा करने की रवायत है।
एक साहब जो मुख्य अतिथि थे - उन्होंने कहा था मैं मंच पर बैठे सभी लोगों के प्रति कृतघ्नना व्यक्त करता हूँ। दरअसल, वे कृतज्ञता व्यक्त करना चाह रहे होंगे। लेकिन इस भाव के लिए उनके दिमाग में वह शब्द बैठा था जिसे वे बेफिक्र होकर बोल गये।
आयोजक का रात को धन्यवाद ज्ञापन के लिए फोन आया। आजकल यह कृतज्ञता ज्ञापित करना आवश्यक हो गयी है। कार्यक्रम से पहले कई चैनलों से उपस्थित होने का न्योता और बाद में आभार व्यक्त करने फोन।
कितना मुश्किल है आजकल कोई कार्यक्रम करना।
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