"बरसों बाद आज नुक्कड़ नाटक शब्द ध्यान में आया", भाई साहब ने कहा।
क्यों ? नुक्कड़ पर तो लगातार नाटक चल रहे हैं!
वह ठीक है। लेकिन नुक्कड़ नाटक कब शुरू हुआ सही में सोचने लगा। इसको शुरू करने वाला कौन था?
भारतीय परंपरा में तो नाटक बहुत पहले से हैं। उनके कई रूप हैं- बांग्ला में जात्रा।
परंतु नुक्कड़ नाटकों का अपना एक संदर्भ और इतिहास है।
इतिहास और संदर्भ की बात करते ही आप पश्चिम पहुँच जायेंगे, है न भाई साहब।
कर भी क्या सकते हैं। हर नयी लहर वहीं से आ रही है।
... जैसे कि लोकतंत्र। आपको अपन सोलह महाजनपद तो याद नहीं होंगे।
अब उस विवाद में नहीं पड़न चाहता। सिर्फ नुक्कड़ नाटक आद आ रहा था। यूरोप के किसी देश में शुरू हुआ था। यह भी कि यह क्लास के विपरीत मास यानी आम लोगों की अभिव्यक्ति का साधन बना था। बाद में भारत में भी ट्रेड यूनियनों और जनआंदोलनों में इसका खूब उपयोग हुआ।
इस लकीर पर चलते हुए। सफदर हाशमी का नाम याद आया। उनकी हत्या याद आयी। लेकिन उस व्यक्ति का नाम याद नहीं आया, जिसको पश्चिम में प्रचलित करने का श्रेय दिया जाता है।
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बर्तोल्त ब्रेख्त। यही नाम है न।
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